तीन माह में ट्रायल पूरा करने के सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
Awaz E Bihar••3 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
मौलाना अब्दुल रहमान कटकी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामाकृष्णन ने अदालत को बताया कि आरोपी पिछले दस वर्षों से जेल में बंद है और इस दौरान उच्च न्यायालय ने दो बार मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का आदेश दिया, लेकिन इसके बावजूद सुनवाई पूरी नहीं हो पाई। दिल्ली मामले में आरोपी को जो सात साल की सजा मिली थी, वह तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने आरोपी की जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपी पर आतंकवाद जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं और आरोपी को जमानत पर रिहा करने से शांति में खलल पैदा हो सकता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि आरोपी को जमानत पर रिहा करने के बजाय ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का आदेश दिया जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामाकृष्णन ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ गवाही देने वाले गवाहों में से 20 गवाह अपने पिछले बयानों से मुकर चुके हैं, इसके बावजूद आरोपी को जेल में रखने पर मजबूर किया जा रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी के मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत आरोपी को जमानत पर रिहा करने के बजाय ट्रायल कोर्ट को सख्त निर्देश जारी कर रही है कि आरोपी के मामले की सुनवाई अगले तीन महीनों में पूरी की जानी है।
अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट जिस दिन मामले की सुनवाई होगी, उस दिन केवल मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के मामले की सुनवाई करेगी, उस दिन किसी अन्य मामले की सुनवाई नहीं होगी। मुख्य न्यायाधीश ने ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के मामले की सुनवाई करने वाले जज के पास से अन्य मामलों को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करें ताकि सत्र अदालत मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के मामले की तेजी से सुनवाई कर सके।
मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि जो गवाह किसी कारण से कटक सत्र अदालत में नहीं पहुंच सकते हैं, उनकी गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिकॉर्ड की जाए और गर्मियों की छुट्टियों में भी सत्र न्यायाधीश मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के मामले की सुनवाई करें और फिर वह सुनवाई पूरी होने के बाद छुट्टियां ले सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामाकृष्णन की याचिका पर कटक सत्र अदालत को निर्देश जारी किया है और निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होने की स्थिति में मौलाना अब्दुल रहमान कटकी सीधे ओडिशा उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं, जिसकी अनुमति सर्वोच्च न्यायालय ने दी है।
पिछले तीन महीनों में, मुख्य न्यायाधीश ने मौलाना अब्दुल रहमान कटकी की जमानत याचिका पर छह बार सुनवाई की है।
आज की अदालती कार्यवाही पर जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने मुंबई में कहा कि हमें उम्मीद थी कि इस बार मौलाना अब्दुल रहमान कटकी को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल जाएगी और हमने आरोपी और उसके परिवार के अनुरोध पर आपराधिक मामलों की प्रसिद्ध वकील नित्या रामाकृष्णन की नियुक्ति भी की थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने जमानत पर रिहा करने के बजाय ट्रायल कोर्ट को सख्त निर्देश दिया है।
मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि सत्र अदालत कटक मुख्य न्यायाधीश के आदेश का पालन करते हुए निर्धारित समय में मामले की बाकी सुनवाई पूरी करेगी और बचाव पक्ष के वकीलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अदालत का पूरा सहयोग करें और जल्द से जल्द मामले की सुनवाई पूरी हो सके, इसके लिए प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में मामले की सुनवाई पूरी हो जाएगी और मौलाना अब्दुल रहमान कटकी को न्याय मिलेगा।
यह उल्लेखनीय है कि मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के खिलाफ दिल्ली, जमशेदपुर और कटक में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से दिल्ली मामले में सात साल की सजा हुई, जबकि जमशेदपुर मामले में मौलाना अब्दुल रहमान कटकी बरी हो चुके हैं। मौलाना अब्दुल रहमान कटकी पर प्रतिबंधित संगठन अल-कायदा के सदस्य होने और भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचने और अवैध तरीके से विदेश जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पिछले दस वर्षों से, जमीयत उलेमा महाराष्ट्र कानूनी सहायता समिति मौलाना अब्दुल रहमान कटकी के मामलों की पैरवी कर रही है।