सरकार रेलवे के विकास और आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी
Awaz E Bihar••17 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन करते हुए कहा कि जिस तरह देश की पहली रेलगाड़ी के साथ मुंबई का नाम जुड़ा हुआ है, उसी तरह इस आधुनिक ट्रेन के साथ जींद का नाम भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। पीएम मोदी ने जींद जंक्शन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद कई विकास परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया।
इस अवसर पर जनता से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, जींद कोई साधारण धरती नहीं है। यह बहादुरी और गर्व की भूमि है। मेरे लिए जींद आना पुरानी यादों की खिड़की खोलने के समान है। कई दशक पूर्व मैं संगठनात्मक कार्य के सिलसिले में जींद आया था। आपने लोगों ने जो मुझे अपनाया और प्यार दिया, मैं उसे आज तक नहीं भूला। मर्रा भैंस का दूध, दही और घी की यादें ऐसी हैं जो कभी भुलाई नहीं जा सकतीं।
उन्होंने कहा, इतने वर्षों में जींद का घी तो नहीं बदला, लेकिन यहां के तेवर जरूर बदल गए हैं। आज जींद भारतीय जनता पार्टी की अच्छी सरकार का एक मॉडल बन रहा है। पिछले वर्षों में पूरा हरियाणा विकास की राह पर आगे बढ़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, आज यहां से देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है। जींद का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। हम पढ़ते हैं कि भारत में पहली ट्रेन बॉम्बे से ठाणे के बीच चली थी। उसी तरह भविष्य में जब हाइड्रोजन ट्रेन का उल्लेख होगा तो जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम भी जरूर लिया जाएगा।
यह ट्रेन जींद से सोनीपत तक 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दौरान ट्रेन जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललत खेड़ा, भानभौड़ा, ईसापुर खेड़ी, बटाना, खंडराई, गोहाना जंक्शन, राबड़ा, लाठ, मोहाना हरियाणा और बड़ौसानी स्टेशनों से गुजरेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय रेलवे की आधुनिकीकरण से संबंधित इस महत्वपूर्ण प्रगति पर जींद की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हरियाणा को 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अन्य विकास परियोजनाओं का तोहफा भी मिला है, जिनमें दो मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।
उन्होंने हरियाणा की जनता की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान में लोग जिस नए जोश और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं, वह अत्यंत हर्षदायक है। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे की विकास और आधुनिकीकरण के लिए इसी संकल्प के साथ काम करती रहेगी।
यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली एक यात्री ट्रेन है, जिसमें एक समय में लगभग 2600 यात्री यात्रा कर सकते हैं। भारत में डिजाइन और विकसित की गई यह ट्रेन पूरी तरह से स्थानीय प्रौद्योगिकी की मदद से तैयार की गई है। इस ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसका डिजाइन 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस ट्रेन के शुरू होने के साथ ही भारत उन कुछ देशों में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों का नियमित संचालन किया जा रहा है। इन देशों में जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, 10 कोच वाली यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली बिजली के माध्यम से चलती है और इससे केवल जल वाष्प (वाटर वेपर) निकलते हैं। यह ट्रेन भारत के नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की प्राप्ति और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद थे।