मुफ्ती सना उल हुदा कासमी एक रिवायत के अनुसार, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जमादी अल-आखिर के गुजरने और रजब अल-मुरज्जब का चाँद उदय होते ही रमजान अल-मुबारक की तैयारी शुरू फरमाते और दुआ करते - 'कि हे अल्लाह, रजब और शाबान में बरकत दे और रमजान अल-मुबारक तक हमें पहुँचा दे (अल्लाहुम्मा बारिक ली फी रजब व शाबान व बलगनी रमजान)'। इसके साथ ही, रजब से ही दैनिक दिनचर्या में इजाफा हो जाता है, शाबान आता तो अधिक मात्रा में रोजे रखते, और इतनी अधिकता होती कि हजरत आयशा रजि. कहती हैं कि लगता है कि रमजान अल-मुबारक के रोजों से मिला देंगे। इसी पृष्ठभूमि में, यह भी फरमाया करते कि शाबान मेरा महीना है, अर्थात रोजे अल्लाह ने इस महीने में फर्ज नहीं किए; लेकिन मुझे वह अमल पसंद है जो अल्लाह की ओर से रमजान में फर्ज है। शाबान की पंद्रहवीं रात में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इबादत का विशेष ध्यान रखते, इस रात में स्वयं अल्लाह रब्बुल इज्जत की ओर से रमजान के आने से पहले ऐसे इनामात और फयूज व बरकात का एलान होता है कि बंदे में खुशी की लहर दौड़ जाती है और ऐसा महसूस होता है कि रमजान की आमद आ रही है। इस रात अल्लाह तआला की रहमतों का नुजूल सूरज ढलने के बाद से ही शुरू हो जाता है। मुनादी आवाज लगातार होता है कि कोई बख्शिश मांगने वाला है जिसे मैं बख्श दूं, है कोई रिज्क मांगने वाला जिस पर रिज्क के दरवाजे खोल दूं। फिर रमजान में जो मगफिरत का एलान आम होता है उससे पहले ही बनू कल्ब की बकरियों के बालों के बराबर पंद्रहवीं शाबान की रात में गुनहगारों की मगफिरत कर दी जाती है, इतनी अधिकता से मगफिरत ही की वजह से इसे लैलतुल बारा कहा जाता है। मुफस्सिरीन की एक राय यह भी है कि अल्लाह ने इस रात में कुरआन करीम के नुजूल का फैसला किया, जिसकी तन्फीज शब-ए-कद्र में हुई; गोया जिस तरह मौसम बहार की आमद से पहले आसार और किरणें बताते हैं कि बाद-ए-बहारी चलने वाली है और सुबह की सफेदी रोशन दिन के आने की खबर देती है, उसी तरह अल्लाह रब्बुल इज्जत इस माह-ए-मुबारक के आने से पहले ही इसके फयूज व बरकात के एक हिस्से का आगाज शाबान से कर देता है। इसी वजह से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमजान की तैयारियों में मशगूल रहते, सहाबा कराम रिजवान अल्लाह तआला अजमईन के सामने रमजान अल-मुबारक की अजमत व अहमियत बयान फरमाते। फिर जब शाबान के आखिरी दिन आते तो रसूल اک्रम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमजान के इस्तकबाल पर तकरीर फरमाते और लोगों को खैर के कामों की तरफ उभारते। इस मौके से आपकी तकरीर जो हजरत सलमान फारसी रजि. के हवाले से अहादीस की किताबों में मौजूद है, इसका खुलासा यह है कि लोगो! एक बा अजमत माह आपके पास आ रहा है यह माह रमजान है। इस माह में जो शख्स कोई नेक काम करेगा उसका सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज अदा करेगा तो उसका सवाब सत्तर फर्ज के बराबर मिलेगा, जो रोजादार को अफ्तार कराएगा वह जहन्नम से खलासी पाएगा और उसे रोजादार के बराबर सवाब मिलेगा, जبकि रोजादार के सवाब में कोई कमी नहीं की जाएगी। और यह सवाब महज एक खजूर या एक घूंट पानी से अफ्तार कराने पर भी मिलेगा। और अगर किसी ने रोजादार को पेट भर खाना खिलाया तो हौज-ए-कौसर से ऐसी सैराबी होगी कि जन्नत में दाखिले तक प्यास नहीं लगेगी और जन्नत भूख प्यास की जगह नहीं है। फरमाया : इस माह का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा दोजख से आजादी का है। अल्लाह तआला इस माह में अपनी खास रहमत से ऐसा इंतजाम करते हैं कि शैतान बंदों को गुमराह नहीं कर सके, और बुराई पर आमादा करने से बाज आ जाए; इस लिए जिन्नात और सरकश शैतानों को पाबंद सिलसिले कर दिया जाता है, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत के दरवाजे पूरे माह के लिए खोल दिए जाते हैं। और मुनादी अल्लाह की तरफ से आवाज लगाता है कि खैर के तालिब आगे बढ़ो और शर की तरफ माइल लोग रुक जाओ, बाज आओ। इतने एहतियाम के बावजूद अगर कोई मुसलमान इस माह से फायदा नहीं उठाता और जन्नत के हासिल के सामान नहीं करता तो बदकिस्मती और शकवत की इन्तहा है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ऐसे लोगों के लिए हजरत जिब्राइल अलैहिस सलाम की बददुआ की है जो रमजान का माह पाए और अपनी मगफिरत न करवाए, उस पर आमीन कहा है। एक हजरत जिब्राइल की बददुआ, और दूसरे हजरत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का आमीन कहना, ऐसे लोगों पर लानत ही लानत का खुला एलान है। यह तमाम इनामात और फयूज व बरकात इस माह में नुजूल-ए-कुरआन की वजह से ही हैं, इस लिए इस माह-ए-मुबारक का हक