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टी वी पर राजनीतिक विश्लेषण को लोकप्रिय बनाने वाले पहले पत्रकार 'विनोद दुआ'
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टी वी पर राजनीतिक विश्लेषण को लोकप्रिय बनाने वाले पहले पत्रकार 'विनोद दुआ'

Awaz E Bihar•10 दिसंबर 2025 को 01:34 pm बजे•4 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

विनोद दुआ एक प्रसिद्ध पत्रकार, टीवी एंकर, राजनीतिक विश्लेषक और लोकप्रिय यूट्यूबर थे। उनका जन्म 11 मार्च 1954 को दिल्ली में एक मध्यम वर्ग के परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में प्राप्त की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के हंस राज कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय से ही अंग्रेजी साहित्य में एमए की डिग्री प्राप्त की।

विनोद दुआ का बचपन दिल्ली की शरणार्थी बस्तियों में बीता। उनके माता-पिता सरायकी हिंदू थे जो भारत विभाजन के बाद अपने पैतृक क्षेत्र डेरा इस्माइल खान से हिंदुस्तान आ गए थे। विनोद दुआ का पत्रकारिता से औपचारिक संबंध 1970 के दशक में शुरू हुआ, जब उन्होंने नवंबर 1974 में पहली बार दूरदर्शन के दिल्ली स्टेशन से प्रसारित होने वाले युवाओं के कार्यक्रम "युवा मंच" में भाग लेकर अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की।

उनका प्रसिद्ध कार्यक्रम "चुनाव विश्लेषण" ने उन्हें पूरे देश में प्रसिद्ध बना दिया। उन्होंने चुनावी आंकड़ों, जन समस्याओं और राजनीतिक अभियानों को बहुत ही सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाया। कहा जाता है कि उनके कार्यक्रम "चुनाव विश्लेषण" ने देश में राजनीतिक रिपोर्टिंग का रुख ही बदल दिया। वे पहली बार सामान्य दर्शकों को यह समझाने में सफल रहे कि चुनाव केवल जीत और हार का खेल नहीं है, बल्कि जन समस्याओं, सरकारी कार्यक्षमता और राजनीतिक रणनीतियों का संग्रह है।

विनोद दुआ की पत्रकारिता शैली बिल्कुल साधारण, सामान्य भाषा में थी, जिससे कठिन राजनीतिक विषयों को भी आम व्यक्ति समझ सकता था, यह उनकी सबसे बड़ी खूबी थी। उनकी बातचीत में नरम व्यंग्य, हास्य और सामाजिक अवलोकन शामिल होते थे जो श्रोताओं को और भी रोचक लगते थे। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार ये उनके निकट अप्रतिबंधित सिद्धांत थे।

विनोद दुआ को सांप्रदायिकता से बहुत नफरत थी। इसलिए वे हमेशा सांप्रदायिक ताकतों की आंखों में खटकते थे। गुजरात के दंगे हों या किसी की मॉब लिंचिंग, विनोद दुआ तड़प उठते थे और रात नौ बजे अपने कार्यक्रम में सब कुछ कह देते थे जो दूसरे पत्रकार कहने से परहेज करते थे। यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात थी। क्योंकि उनके माता-पिता विभाजन के बाद सीमा के उस पार पंजाब से अपना घर-बार लूटवा कर हिंदुस्तान आए थे। दिल्ली के पंजाबी आमतौर पर सांप्रदायिकता का शिकार हो गए, लेकिन विनोद दुआ के जीवन में कहीं भी विभाजन की कसौटी का साया नहीं दिखता था।

विनोद दुआ की पत्रकारिता में कुछ विशेषताएं प्रमुख थीं: 1. वे बिना अनुसंधान के कोई बात नहीं करते थे। आंकड़े, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और जमीनी तथ्य उनके विश्लेषणों का आधार होते थे। 2. साधारण लेकिन प्रभावी भाषा, बातचीत प्रवाही, और लहजा सामान्य समझ में आता था। यही वजह थी कि देहात, कस्बों और शहरों का आम नागरिक भी उनकी बात समझ लेता था। 3. व्यंग्य के साथ सच्चाई का उपयोग वे इतनी महारत से करते थे कि बात दिल में उतर जाती और किसी का दिल दुखाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। 4. साहस और निष्पक्षता उनकी पत्रकारिता में प्रमुख थीं। वे किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकने वाले पत्रकार थे।

विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में उस समय की सरकारों पर सवाल उठाने के लिए प्रसिद्ध थे। उन पर बीजेपी शासित राज्यों की पुलिस ने कई मामले दर्ज किए थे। 2016 से 2018 के बीच वे 'द वायर' से जुड़े हुए थे और 'जन गण मन' की बात नामक कार्यक्रम पेश किया करते थे। 2019 की शुरुआत में वे सुराज टीवी और एचडब्ल्यू न्यूज के साथ जुड़े। 2018 में जब 'मी टू' आंदोलन अपने शिखर पर था, उस समय फिल्म निर्माता निष्ठा जैन की ओर से 1989 में हुए एक घटना को लेकर विनोद दुआ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। दुआ ने इन आरोपों का सख्ती से खंडन किया था और स्वेच्छा से अपने शो को बंद करते हुए एक स्वतंत्र पैनल के माध्यम से इन आरोपों की जांच के लिए तैयार हो गए थे।

विनोद दुआ का सबसे बड़ा कार्य यह था कि उन्होंने भारत में आलोचनात्मक और संवैधानिक पत्रकारिता की नींव को मजबूत किया। वे शक्तिशाली हलकों पर आलोचना करने से नहीं हिचकिचाते थे। उनका मानना था: "मीडिया का काम सरकार का प्रवक्ता बनना नहीं है, बल्कि जनता का वकील बनना है।" विनोद दुआ केवल एक अनुभवी पत्रकार ही नहीं थे, बल्कि वे एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें 2008 में पत्रकारिता में उत्कृष्ट सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था।

विनोद दुआ के निधन पर देश और विदेशों में विभिन्न हलकों खासकर पत्रकारिता जगत की ओर से बड़े पैमाने पर शोक मनाया गया। प्रसिद्ध कवि
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